makar sankranti 2020 : मकर संक्रांति पर जरूरी बातें, जानिए पं. कपिल शर्मा ( काशी) की भविष्यवाणी


उत्साह, हर्ष, संस्कार, वैज्ञानिक अर्थो से परिपूर्ण है सनाातन संस्कृति , मकर संक्राति विशेष जानकारी हम पं. श्री कपिल शर्मा (काशी) जी से जान रहे है, कैसे यह पर्व मनाएं और कैसा रहेगा राशिफल साथ ही क्या असर होगा इस मकर संक्रांति का सभी राशि वालों पर…

ज्योतिष विज्ञान पर आधारित ग्रहों के परिवर्तन एवं उनसे निर्मित विशेष पर्व ग्रहों के परिवर्तन एवं उनसे निर्मित विशेष पर्व ग्रहों के राजा सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में गोचर परिवर्तन के दिन को संक्राति कहा जाता है। एक वर्ष में बारह संक्राति होती है। हर संक्राति का एक विशेष महत्व होता है। मकर सक्रांति अतिविशेष महत्व एवं प्रभाव की संक्रांति होती है। धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है, उस दिन यह उत्सव मनाया जाता है।

(पंडित कपिल शर्मा जी )

पुराणों एवं ज्योतिष ग्रंथों में वर्जित है उस दिन विशेष पुण्य काल होता है उस समय किए गए मंत्र जाप, पूजा, हवन एवं पीतृ तर्पण का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति से जुड़ी कई प्रचलित पुराणिक कथाएं है ऐसी मान्यता है भगवान सूर्य उस दिन अपले पुत्र शनि से मिलने मकर राशि में आते है। महाभारत ग्रंथ अनुसार भीष्मपितामह ने बाणों की शयया पर लेकर 6 माह प्रतीक्षा की एवं मकर संक्रांति के दि नही उन्होंने अपने प्राण त्यागे थे। राजा भागीरथ ने भी इस दिन गंगा मां को कपिल मुनि के आश्रम होते हुए गंगा सागर में विलिन किया एवं राजा भागीरथ ने अपने पुर्वजों का तर्पन किया। मकर संक्रांति के पुण्य काल में प्राण त्योगने वालों की मुक्ति निश्चित ही होती है।

मकर संक्रांति के पकवान – मकर संक्रांति शीत ऋतु में आती है तापमान अधिक कम होने से शरीर को उष्णता देने वाले पदार्थो का सेवन कियाा जाता है। तिल एवं गुड के लड्डू, घी युक्त खिचड़ी, बाजरे का खिचड़ा एवं बाजरे की रोटी का सेवन किया जाता है।

इस वर्ष सन् 2020, 15 जनवरी, बुधवार, माघ, कृष्ण पक्ष पंचमी पूर्वा फाल्गूनी नक्षण, दिन के तृतीयांश में एवं रात्रि के चतुर्थ प्रहर में हो रही है। सूर्यास्त बाद सौम्यायन संक्रांति लगने पर दुसरे दिन पूर्वार्ध में संकांति का पूण्यकाल होता है।

तैतिल करण में यदी सर्यू की संक्रांति हो तो सूर्य सोते हुए संक्रमण करते है। सोते हुए संक्रमण करने पर वस्तुओं के भाव और वर्षा पर बुरा प्रभाव डालते हैै।

संक्रांति का आगमन – युवावस्था, पाण्डु वस्त, पीत वर्णकाउपवस्त्र धारण किए हुए है, मृतिका का लेपन किए, एक हाथ में दण्डायुध, दूसरे हाथ में कास्य पात्र में पक्वान्न भक्षण (पुड़ी मालपुआ) करते हुए, प्रवाल के आभूषण धारण किए, जातिपक्षी केतकी पुष्प धारण किए, सुप्त अवस्था में गधे की सवारी किए हुए हो रहा है।

 

बारह राशियों पर सूर्य के परिवर्तन के प्रभाव एवं उपाय –

1. मेष – जल में पीले पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दे। एवं गुड़ और तिल का दान दे उच्च पद की प्राप्ती होगी।

2. वृषभ – जल में सफेद चंदन, दुग्ध, श्वेत, पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। बड़ी जवाबदारी मिलने तथा महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ होने के योग बनेंगगे।

3. मिथुन – जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे। गाय को हरा चारा दे। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दे। ऐश्वर्य की प्राप्ती होगी।

4. कर्क – जल में दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे। चावल- मिश्री – तिल का दान दे। कलह, संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।

5. सिंह – जल में कुमकुम तथा रक्त पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दे। तिल, गुड़, गेंहूँ, सोना दान दे। किसी बड़ी उपलब्धि की प्राप्ती होगी।

6. कन्या – जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दे। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दे। गाय को चारा दें। शुभ समाचार मिलेगा।

7. तुला – जल में सफेद चंदन, दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे। चावल का दान दे। व्यवसाय में बाहरी संबंधों से लाभ तथा शत्रु अनुकुल होंगे।

8. – वृश्चिक – जल में कुमकुम, रक्तपुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान दे। विदेशी कार्यो से लाभ तथा विदेश यात्रा होगी।

9. धनु – जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे। चंहुओंर विजय होगी।

10. मकर – जल में काले नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे। गरीब अपंगों को भोजन दान दे। अधिकार प्राप्ति होगी।

11. कुंभ- जल में नीले काले पुष्प, काले उड़द, सरसों का तेल – तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। तेल – तिल का दान दे। विरोधी परास्त होंगे।

12. मीन – हल्दी, केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। सरसों, केसर का दान दें। सम्मान यश बढ़ेगा।

संक्रांति पुण्यकाल – सूर्योदय से सूर्यास्त तक

महापुण्यकाल – सूर्योदय से 9ः30 बजे सुबह तक

पुण्यकाल में अपने गुरूमंत्र, रामरक्षा स्त्रोत, ईष्ट मंत्र, विष्णुसहस्त्रानाम, गजेन्द्रमोक्ष, संदरकाण्ड करने का विशेष महत्व है। गौ पूजा, गौ दान एवं गायों को हरा चारा खिलाए। तिल के उबटन से स्नान, तिल भक्षण एवं तिल का दान एवं तिल से हवन इन सभी कार्यो का विशेष महत्व है।

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